बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त ने हाल ही में शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर टुनाइट’ में अपनी जिंदगी के उस दौर को याद किया, जब उन्हें जेल जाना पड़ा था। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। संजय ने कहा कि अधिकारियों को लगता था कि उनकी स्टारडम से जुड़ी सुविधाएं छीनकर उन्हें कमजोर किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
‘सर, यहां बीड़ी तो मिलेगी?’

संजय दत्त ने जेल से जुड़ा एक ऐसा किस्सा भी सुनाया, जिसने बातचीत को खास बना दिया। उनके मुताबिक, एक अधिकारी ने उनसे कहा कि जेल में उन्हें सिगरेट नहीं मिलेगी और फिर पूछा कि अब वह क्या करेंगे। इस पर संजय ने जवाब दिया, ‘सर, यहां बीड़ी तो मिलेगी।’ अभिनेता ने बताया कि इस तरह के हालात से वह घबराए नहीं और अधिकारियों को भी उनकी प्रतिक्रिया से हैरानी हुई।
पिता के सामने पहनाई गई हथकड़ी
संजय ने उस भावुक पल का भी जिक्र किया, जब पुलिस ने पहली बार उनके पिता सुनील दत्त के सामने उन्हें हथकड़ी पहनाई थी। अभिनेता के मुताबिक, उनके पिता की आंखों में आंसू आ गए थे और उन्होंने पूछा था कि उनके बेटे के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। संजय ने उन्हें गले लगाकर समझाया कि यह प्रक्रिया का हिस्सा है और उन्हें परेशान नहीं होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि अंदर से वह खुद भी बेहद आहत थे, लेकिन पिता के लिए मजबूत बने रहना चाहते थे।
‘मैं कभी कमजोर महसूस नहीं हुआ’

शेखर सुमन ने संजय से पूछा कि क्या जेल के मुश्किल दौर में कभी उन्होंने जिंदगी खत्म करने के बारे में सोचा था। इस पर अभिनेता ने साफ शब्दों में जवाब दिया- ‘कभी नहीं।’ उन्होंने कहा कि उनके पिता और परिवार ने बहुत कुछ सहा, लेकिन उन्होंने खुद को कमजोर महसूस नहीं किया। संजय ने अपने माता-पिता और अपनी परवरिश को भी अपने नजरिए के लिए अहम बताया।
1993 से जुड़ा रहा लंबा कानूनी दौर
संजय दत्त की गिरफ्तारी 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले से जुड़े अवैध हथियार रखने के मामले में हुई थी। बाद में उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया गया, जबकि आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में उनकी सजा को छह से घटाकर पांच साल किया था। वह 2016 में जेल से रिहा हुए।






