वर्ल्ड में चौथी बार टीम इंडिया फाइनल मुकाबला खेलने वाली है। 19 नवंबर को रोहित ब्रिगेड की टक्कर कंगारू टीम से होने वाली है। वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया के साथ टॉस का एक दिलचस्प कनेक्शन रहा है। आइए समझें कि अब तक खेले गए तीन वर्ल्ड कप मुकाबले में टॉस की क्या कहानी रही है।
Ind Vs Aus Final World Cup Match: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अहमदाबाद में फाइनल मैच आयोजित है। भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने फाइनल मुकाबले में टॉस गंवाया। यह एक संयोग है कि भारत ने तीसरी बार फाइनल में टॉस गंवाया है।

इससे पहले 1983 और 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में टॉस गंवाया था, लेकिन टीम ने ट्रॉफी जीती थी। आइए एक नजर डालते हैं कि वर्ल्ड कप में खेले गए तीन फाइनल मुकाबले टीम इंडिया और टॉस का क्या किस्मत कनेक्श्न रहा है।
भारत बनाम वेस्टइंडीज
लंदन के लॉर्ड्स मैदान में खेले गए फाइनल मुकाबले में वेस्टइंडीज ने टॉस जीत लिया। वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लॉयड थे और भारत की ओर से कप्तानी कपिल देव कर रहे थे। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया की ओर से कृष्णम्माचारी श्रीकांत ने 38 रन और मोहिंदर अमरनाथ ने 26 रन बनाए। टीम इंडिया ने 54.4 ओवर में 183 रन जोड़ने में कामयाब हुए।
इसके बाद भारतीय टीम गेंदबाजी करने उतरी और वेस्टइंडीज को 52 ओवर में 140 रन पर ही ऑल आउट कर दिया। इस मैच में मोहिंदर अमरनाथ और मदन लाल ने तीन-तीन विकेट चटकाए। वेस्टइंडीज की ओर से विव रिचर्ड्स ने 28 गेंदों पर 33 रन की पारी खेली थी। टॉस गंवाने के बावजूद टीम इंडिया ने जीत हासिल कर ली।
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया

वर्ल्ड कप 2003 का फाइनल मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) के बीच दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में खेला गया। इस मैच में टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की ओर से रिकी पोंटिंग ने 140 रन और डेमियन मार्टिन ने 88 रनों की शानदार पारी खेली। कंगारू टीम ने भारतीय टीम को 360 रन का टारगेट दिया। इस लक्ष्य का पीछा करने में टीम इंडिया नाकामयाब रही। भारतीय टीम महज 234 रन पर ढेर हो गई।
भारत बनाम श्रीलंका

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में टॉस के दौरान एक अजीबोगरीब घटना घटी। दरअसल, इस मैच के लिए एक नहीं बल्कि दो बार टॉस हुए। मैच रेफरी जेफ क्रो, टीम इंडिया के कप्तान एमएस धोनी और श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा के साथ-साथ टॉस प्रेजेंटर भी पिच पर टॉस के लिए मौजूद थे।
एमएस धोनी ने सिक्का हवा में उछाला था, लेकिन वानखेड़े स्टेडियम में दर्शकों का इतना शोर था कि कि मैच रेफरी जेफ क्रो संगकारा की आवाज (हेड या टेल) नहीं सुन पाए थे। ऐसे में फैसला हुआ कि दोबारा टॉस किया जाएगा।
दूसरी बार श्रीलंका ने टॉस जीत लिया और पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका की ओर से महेला जयवर्धने ने शतकीय पारी खेली। श्रीलंका ने 50 ओवर में छह विकेट गंवाकर 274 रन बनाए। इसके जवाब में टीम इंडिया की ओर गौतम गंभीर ने 97 रन और एम एस धोनी ने 91 रन की नाबाद पारी खेली। भारत ने 28 साल बाद वर्ल्ड कप ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमा लिया।





