1993 में मुंबई ब्लास्ट में संजय दत्त का नाम जोड़ा था। उनके ऊपर आरोप लगाए गए थे कि उनके पास आतंकवादियों के हथियार रखे थे। इसके बाद उन्हें कुछ समय जेल में भी रहना पड़ा था। इस दौरान उन्हें डर लगा था कि उनका एनकाउंटर हो सकता है। इसका खुलासा हाल ही में एक आईपीएस ऑफिसर ने किया है। आईये जानते हैं उनके इस किस्से के बारे में।
आईपीएस ने किया खुलासा
पूर्व आईपीएस अधिकारी मीरां चड्डा बोरवणकर ने मैडम कमिश्नरः द एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ ऑफ एन इंडियन पुलिस चीफ ने अपनी किताब के इंटरव्यू में कहा है- दत्त को डर था कि वो ट्रांसफर के दौरान किसी एनकाउंटर में मारे जाएंगे। वो इतने डरे हुए थे कि उन्हें पसीना आने लगा था। उनका कहना था कि उन्हें बुखार हो गया है और वो दूसरे जेल नहीं जा पाएंगे।

इसी बीच उनके आर्थर रोड जेल से बाहर निकलने की खबर लीक हो गई और जेल के गेट के बाहर भारी भीड़ जमा होने लगी। भीड़ की वजह से हमने इस ट्रांसफर को पोस्टपोन करने का फैसला किया। फिर दत्त से कहा गया कि वो इन चीजों पर ज्यादा ना रिएक्ट करें। उन्हें यह भी समझाया गया है कि एनकाउंटर के बारे में उनकी आशंका गलत है। कुछ समय बाद हम उन्हें आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवदा जेल ले जाने में सफल रहे।
जेल में साधारण रूप से रहते थे
मीरान चड्डा ने आगे कहा- उन दिनों ये बातें बहुत ज्यादा सुर्खियों में थीं कि जेल में दत्त को स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। मगर ऐसा नहीं था। वह आमतौर पर जेल में अच्छे थे क्योंकि उनकी पैरोल और जेल में छुट्टी उनके बिहेवियर पर ही निर्भर थी। अगर उन्होंने अच्छा व्यवहार नहीं किया होता, तो हम उन्हें छुट्टी या पैरोल की परमिशन नहीं देते। इतना ही नहीं वह जेल में काम भी करते थे।
इसी इंटरव्यू में मीरां चड्डा बोरवणकर ने इस सवाल का जवाब दिया कि क्या संजय दत्त को जेल के अंदर घर का मिल रहा था। इस पर उन्होंने कहा कि जब भी बड़े नेता, एक्टर और एक्ट्रेसेस जेल के अंदर आते हैं, तो उन्हें लगता है कि वो वीआईपी हैं। जब दत्त आर्थर रोड जेल में थे, तब वे अंडर ट्रायल पर थे। इस कारण उन्हें वहां पर घर के खाने की परमिशन मिली थीं। फिर जब उन पर जुर्म साबित हो गया और उन्हें यरवदा जेल में शिफ्ट किया गया, तब मजिस्ट्रेट के फैसले के बाद इस परमिशन में बदलाव किए गए थे।





