‘बेटे के पास सब कुछ है, फिर भी करनी होगी मेहनत’, संजय गुप्ता की सीख ने छू लिया दिल!
बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर संजय गुप्ता अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपनी बेबाक सोच और पारिवारिक जिंदगी को लेकर भी चर्चा में रहते थे। अब उनके बेटे शिवांश के लिए लिखी गई एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट लोगों का ध्यान खींच रही है। इसमें संजय ने अपने बेटे की तारीफ करते हुए ऐसी बात कही थी, जो आज के दौर में हर माता-पिता और बच्चे के लिए एक बड़ी सीख है।
दरअसल, संजय गुप्ता ने अपने बेटे शिवांश की तस्वीर साझा करते हुए बताया था कि उनका बचपन काफी संघर्षों में गुजरा। उनके पास सुविधाओं की कमी थी, लेकिन उनका बेटा आज ऐसी जिंदगी जी रहा है, जहां उसे लगभग हर सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद शिवांश ने मेहनत और अनुशासन का रास्ता चुना है।
संजय ने पोस्ट में लिखा था, 'मैं अक्सर तुम्हें अपने मुश्किल बचपन की कहानियां सुनाता हूं। हमारे पास कभी ज्यादा कुछ नहीं था, लेकिन मेरे बेटे शिवांश, तुम्हारे पास सब कुछ है। इसके बावजूद तुम अपनी अलग पहचान बनाने के लिए मेहनत कर रहे हो।'
उन्होंने आगे बताया कि शिवांश रोज सुबह 5 बजे उठता है और करीब 5:30 बजे रिक्शे से जिम पहुंच जाता है। इसके बाद वह खुद स्कूल जाता है। खास बात यह है कि घर में ड्राइवर और दूसरे कर्मचारी होने के बावजूद शिवांश अपनी जिम्मेदारियां खुद निभाना पसंद करता है। संजय के मुताबिक, बेटे की यही आदत उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित करती थी। The Hawk
फिल्ममेकर ने अपने बेटे के अनुशासन और आत्मनिर्भरता पर गर्व जताते हुए लिखा था कि उसे अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते और खुद अपनी राह बनाते देखकर उन्हें बेहद खुशी होती है। उन्होंने बेटे को हमेशा प्यार देने की बात भी कही थी।
संजय गुप्ता की यह पोस्ट अब उनके निधन की खबर के बीच एक बार फिर चर्चा में है। 31 अक्टूबर को उनके निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत में शोक की लहर है। The Times of India +1
बता दें कि संजय गुप्ता ने 'कांटे', 'शूटआउट एट लोखंडवाला', 'मुसाफिर', 'जज्बा' और 'काबिल' जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनकी फिल्मों में एक्शन और अपराध की दुनिया की कहानियों का खास अंदाज देखने को मिलता था।
उनकी बेटे के लिए लिखी यह बात सिर्फ एक पिता की भावनाएं नहीं, बल्कि जिंदगी का एक खूबसूरत संदेश भी है कि विरासत में मिली सुविधाएं सफलता की गारंटी नहीं होतीं। असली पहचान इंसान की अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन से बनती है। यही सीख संजय गुप्ता अपने बेटे को देना चाहते थे।



