सलमान खान के पिता सलीम खान बाॅलीवुड के मशहूर राइटर माने जाते हैं। उन्होंने कई बाॅलीवुड एक्ट्रस को अपने लिखे डायलॉग से फेमस किया है। उन्होंने देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से सपनों की नगरी मुंबई तक सफर तय किया है। उनका यह सफर काफी रोमांचक रहा ।आईये जानते है उनके इस सफर के बारे में।
एक्टर बनने के लिए आया बुलावा
दरअसल एक दिन सलीम खान इंदौर में हुई एक शादी में पहुंचे थे। उस शादी में फिल्म ‘गांव की गोरी’ बनाकर मशहूर हुए फिल्ममेकर के. अमरनाथ भी पहुंचे थे। सलीम खान बेहद हैंडसम थे, जिन पर अमरनाथ की नजरें टिक गईं। उन्होंने तुरंत सलीम खान को बुलाकर अपनी फिल्म का ऑफर दे दिया। सलीम ने झिझकते हुए कहा कि उन्हें एक्टिंग नहीं आती।

इस पर अमरनाथ ने उन्हें दिलीप कुमार का उदाहरण देकर कहा कि उन्होंने भी कभी एक्टिंग नहीं सीखी, लेकिन वो स्टार हैं। जब सलीम राजी हुए तो डायरेक्टर के. अमरनाथ ने उन्हें तुरंत 1000 रुपए थमा दिए और अपना पता देकर बॉम्बे (अब मुंबई) बुला लिया।सलीम खान मुंबई तो पहुंच गए, लेकिन उन्हें न उस शहर की जानकारी थी, न इंडस्ट्री की। मरीना गेस्ट हाउस पहुंचकर उन्होंने 55 रुपए में एक कमरा ले लिया। एक कमरे में दो बिस्तर लगे हुए थे। दूसरे बिस्तर में जो शख्स आया, उसके जोरदार खर्राटों ने सलीम की नींद इस कदर उड़ाई कि उन्होंने ठान लिया कि जल्द से जल्द 110 रुपए में पूरा कमरा बुक करूंगा।
शुरुआत में हाथ लगी निराशा
केअमरनाथ के पास पहुंचे तो उन्हें फिल्म बारात में साइड हीरो का रोल मिल गया। उन्हें पहले ही हजार रुपए साइनिंग अमाउंट के दिए जा चुके थे। इसके अलावा उन्हें हर महीने के 400 रुपए दिए गए। फिल्म चल नहीं सकी और सलीम खान को भी कोई खास पहचान नहीं मिली। फिल्म से मिले पैसे भी कम पड़ने लगे और उन्हें गुजारा करने के लिए भाइयों से पैसे मंगवाने पड़े।

उनके गुड लुक की बदौलत उन्हें बी-ग्रेड फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिल जाया करते थे, लेकिन उनसे उन्हें पहचान नहीं मिली। उनके खाते में 1966 की हिट फिल्में तीसरी मंजिल, सरहदी लुटेरा और 1967 की दिवाना, छलिया बाबू भी रहीं, लेकिन इनसे भी कोई फायदा नहीं मिला। ये बात खुद सलीम साहब ने अरबाज खान के चैट शो द इन्विंसिबल में कही थी। इसके बाद कई और फिल्मों में काम किया।





