Bollywood News: एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को एक बार फिर गहरा सदमा लगा है। पान सिंह तोमर के लेखक संजय चौहान का 62 साल की उम्र में देहांत हो गया है। आपको बता दें संजय लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे। अचानक ही कुछ दिन पहले संजय को इंटरनल ब्लीडिंग शुरू हो गई जिसके बाद वो बेहोश हो गए। हालत ज्यादा खराब होते देख उन्हें फौरन एच एन रिलायंस हॉस्पिटल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें बाद में मृत घोषित कर दिया।

10 दिन पहले इंटरनल ब्लीडिंग
संजय चौहान लिवर सिरोसिस नाम के रोग से पीड़ित थे। लेकिन अचानक shi 10 दिन पहले उनको इंटरनल ब्लीडिंग शुरू हो गई। जरूरत से ज्यादा खून बह जाने से संजय की हालत काफी नाजुक हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने उन्हें फौरन हॉस्पिटल में एडमिट कराया। डॉक्टर्स की काफी मेहनत के बाद भी उन्हें बचाया ना जा सका।
संजय चौहान के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी सारा है। परिजनों ने बताया की संजय का अंतिम संस्कार 13 जनवरी को मुंबई के ओशिवारा शमशान घाट में किया जाएगा। इस खबर से इंडस्ट्री में दुख की लहर छा गई है। लोग अपने अपने तरीके से संजय चौहान को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। संजय चौहान के मित्र और फिल्मेकर अविनाश दास ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिख कर अपना दुख व्यक्त किया है।

अविनाश दास ने बताया की संजय उनके लिए संग्रक्षक की तरह थे। आगे उन्होंने लिखा है की संजय कमाल का सेंस ऑफ ह्यूमर रखते थे और ऐसे इंसान को भुलाया नहीं जा सकता। अविनाश उन्हें याद करते हुए कहते हैं कि संजय अचानक ही चले जायेंगे ऐसा कभी नहीं सोचा था। कई बार होता है लोग बीमार पड़ते हैं लेकिन ठीक हो जाते हैं। मौत के मुंह से बाहर आ जाते हैं। लेकिन सच तो यही है कि अब संजय चौहान हमारे बीच नहीं रहे।

पत्रकारिता में भी थी रुचि
संजय चौहान भोपाल के रहने वाले थे। उन्होंने अपने कैरियर की शुरूवात दिल्ली से एक पत्रकार के तौर पर शुरू की थी। बाद में वे मुंबई रवाना हो गए। संजय ने 1990 में एक क्राइम सीरीज भी लिखी थी जिसका नाम भंवर था। 2011 में संजय को ‘I am Kalam ’ के लिए बेस्ट स्टोरी के लिए फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुका है। इन सबके अलावा संजय चौहान साहेब बीवी गांगेस्टर, धूप, मैंने गांधी को नहीं मारा जैसी फिल्मों के लिए भी खूब सराहा गया है।



