रक्षा बंधन आते ही जिस गाने की धुन हर तरफ सुनाई देने लगती है, वह है ‘फूलों का तारों का, सबका कहना है…’। भाई-बहन के रिश्ते की मिठास को बयां करने वाला यह गीत आज त्योहार का मानो हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गाना असल में रक्षा बंधन के लिए बनाया ही नहीं गया था? करीब 55 साल पहले बनी फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का यह गीत अपने पीछे एक ऐसा दिलचस्प किस्सा समेटे है, जो इसे और खास बना देता है।
भाई-बहन के रिश्ते की पहचान बना गाना
देव आनंद की फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ साल 1971 में रिलीज हुई थी। फिल्म में ‘फूलों का तारों का’ गीत ने दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई। गाने में भाई और बहन के रिश्ते की मासूमियत, प्यार और भावनाओं को जिस खूबसूरती से पेश किया गया, उसने इसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया।

समय के साथ यह गीत रक्षा बंधन का पर्याय बन गया। राखी के मौके पर भाई-बहन के वीडियो से लेकर सोशल मीडिया पोस्ट तक, इस गाने का इस्तेमाल खूब किया जाता है। हालांकि, इसके बनने की कहानी त्योहार से कहीं अलग है।
लता मंगेशकर की आवाज ने बदली तस्वीर
इस गीत को पंचम दा यानी आर. डी. बर्मन के संगीत निर्देशन में तैयार किया गया था और इसे लता मंगेशकर ने अपनी जादुई आवाज दी थी। गीत की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी और भावनात्मक गहराई है।

कहा जाता है कि लता मंगेशकर की गायकी ने इस गीत में ऐसी आत्मीयता भर दी कि यह सिर्फ फिल्म का एक गाना न रहकर भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं का प्रतीक बन गया। उनकी आवाज में छिपा अपनापन गीत को सीधे दिल तक पहुंचाता है।
पंचम दा भी रह गए थे हैरान
लता मंगेशकर और आर. डी. बर्मन की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए। ‘फूलों का तारों का’ भी इसी शानदार साझेदारी का हिस्सा था। गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान लता जी की गायकी और उनकी भावनात्मक पकड़ ने पंचम दा को प्रभावित किया।

यही वजह है कि पांच दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी यह गीत अपनी चमक नहीं खो पाया है। खास बात यह है कि इसे रक्षा बंधन को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया था, लेकिन दर्शकों ने इसे भाई-बहन के प्यार से इतना जोड़ दिया कि यह त्योहार की स्थायी पहचान बन गया।
आज जब भी राखी आती है और कहीं से ‘फूलों का तारों का…’ सुनाई देता है, तो यह सिर्फ एक पुराना फिल्मी गीत नहीं लगता, बल्कि बचपन, भाई-बहन की नोकझोंक और उस रिश्ते की अनमोल यादों को फिर से जिंदा कर देता है।




