कंगना रनौत हुईं ‘हनुमान अंश’ की मुरीद, बोलीं- नीम करोली बाबा की कहानी फिल्म नहीं, एक सत्संग है
नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा में है। अब बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने भी फिल्म की जमकर तारीफ की है। कंगना ने सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए इसे महज एक फिल्म मानने से इनकार किया और ‘सत्संग’ जैसा अनुभव बताया।
कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर नीम करोली बाबा की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा कि ‘हनुमान अंश’ कोई फिल्म नहीं, बल्कि एक सत्संग है। उनके मुताबिक, फिल्म में उन लोगों के अनुभवों को छोटी-छोटी कहानियों के रूप में खूबसूरती से पिरोया गया है, जिन्हें नीम करोली बाबा के साथ प्रत्यक्ष अनुभव रहा था।

कंगना ने अपने अंदाज में दर्शकों से फिल्म देखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अपनी थेरेपी छोड़िए और यह फिल्म देखने जाइए। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है और फिल्म के आध्यात्मिक प्रभाव को लेकर लोगों का ध्यान खींच रहा है।
बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन
दिलचस्प बात यह है कि ‘हनुमान अंश’ की चर्चा सिर्फ इसके आध्यात्मिक कंटेंट तक सीमित नहीं है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म भारत में ₹50 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। करीब ₹2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म की सफलता ने इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

फिल्म में शोभिनव सत्य ने नीम करोली बाबा की भूमिका निभाई है, जबकि इसका निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। कंगना की तारीफ ऐसे समय आई है जब फिल्म की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। मेकर्स ने भी इसकी सफलता के बाद आगे की कहानी पर काम करने के संकेत दिए हैं।
कौन थे नीम करोली बाबा?
नीम करोली बाबा एक महान हिंदू संत थे। उन्हें हनुमान जी का साक्षात अवतार माना जाता है। वह एक आध्यात्मिक गुरु भी थे। उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा उर्फ लक्ष्मण दास था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव में साल 1900 के आसपास का बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब नीम करोली बाबा ट्रेन से सफर कर रहे थे, तो टिकट न होने पर टीटीई ने उन्हें यूपी एक गांव के पास उतार दिया, जिसका नाम नीमकरली था। लेकिन फिर लाख कोशिशों के बावजूद ट्रेन आगे नहीं बढ़ पाई। फिर नीम करोली बाबा को दोबारा जब ट्रेन में बैठा लिया गया, तभी वह आगे बढ़ी। तभी से लक्ष्मण दास जी का नाम नीम करोली बाबा बड़ गया। उन्होंने साल 1964 में उत्तराखंड के नैनीताल के पास कैंची धाम आश्रम की स्थापना की थी, जहां आज दुनियाभर की हस्तियां दर्शन के लिए जाती हैं।






