Teachers Day Special: अक्षय कुमार से कियारा आडवाणी तक, बॉलीवुड में चमकने से पहले टीचर थे ये सितारे
मुंबई की फिल्मी दुनिया में आज जिन सितारों की एक झलक पाने के लिए फैंस बेताब रहते हैं, उनमें से कुछ ने कभी क्लासरूम में बच्चों को पढ़ाया था। किसी ने मार्शल आर्ट्स सिखाई, किसी ने संगीत और किसी ने एक्टिंग की बारीकियां। शिक्षक दिवस के मौके पर जानिए उन बॉलीवुड सितारों की कहानी, जिनका सफर स्टारडम से पहले 'गुरु' बनने से होकर गुजरा।
अक्षय कुमार: एक्टिंग से पहले सिखाते थे मार्शल आर्ट्स

अक्षय कुमार की फिटनेस और मार्शल आर्ट्स के प्रति दीवानगी से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन शायद कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले वह मार्शल आर्ट्स टीचर भी रह चुके हैं। थाईलैंड में मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने मुंबई लौटकर बच्चों को यह कला सिखाई। यही काम उनके लिए आगे चलकर बॉलीवुड के दरवाजे खोलने का जरिया भी बना। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके एक स्टूडेंट के पिता ने उन्हें मॉडलिंग का सुझाव दिया था और यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
कियारा आडवाणी: कैमरे के सामने आने से पहले नन्हे बच्चों की टीचर

आज कियारा आडवाणी बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं, लेकिन फिल्मों में कदम रखने से पहले उनका जुड़ाव बच्चों से था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कियारा ने नर्सरी स्कूल में बतौर टीचर काम किया था। यानी जिस अभिनेत्री को आज बड़े पर्दे पर अलग-अलग किरदार निभाते देखा जाता है, वह कभी छोटे बच्चों को पढ़ाने और संभालने की जिम्मेदारी निभाती थीं। 2014 में 'फगली' से बॉलीवुड डेब्यू करने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई और आगे चलकर 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी', 'कबीर सिंह' और 'गुड न्यूज' जैसी फिल्मों ने उन्हें खास पहचान दिलाई।
अनुपम खेर: क्लासरूम से एक्टिंग की दुनिया तक
अनुपम खेर की कहानी तो इस मामले में और भी दिलचस्प है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने लखनऊ में करीब दो साल तक एक्टिंग सिखाई। इसके बाद मुंबई का रुख किया और यहां भी अभिनय सिखाते हुए थिएटर और फिल्मों के लिए ऑडिशन देते रहे। बाद में उन्होंने अपना एक्टिंग स्कूल 'Actor Prepares' शुरू किया, जहां कई जाने-माने कलाकारों ने ट्रेनिंग ली।
चंद्रचूड़ सिंह: स्कूल में पढ़ाया संगीत और इतिहास
'माचिस' और 'क्या कहना' जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाले चंद्रचूड़ सिंह भी ग्लैमर की दुनिया में आने से पहले शिक्षक रह चुके हैं। वह दिल्ली के वसंत वैली स्कूल में संगीत पढ़ाते थे और बाद में अपने पुराने स्कूल द दून स्कूल में इतिहास पढ़ाया। अभिनय में बड़ा मौका मिलने तक उन्होंने शिक्षक की नौकरी को गंभीरता से निभाया और यहां तक सोचा था कि अगर एक्टिंग में करियर नहीं बना तो वह स्थायी रूप से पढ़ाने का काम करेंगे।
कादर खान: इंजीनियरिंग के प्रोफेसर से बॉलीवुड के दिग्गज तक

कादर खान का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने मुंबई के एम.एच. साबू सिद्दीक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर के रूप में काम किया। वह गणित और इंजीनियरिंग से जुड़े विषय पढ़ाते थे। इसी दौरान उनका थिएटर से जुड़ाव भी बना रहा। एक कॉलेज नाटक में उनके अभिनय ने दिलीप कुमार का ध्यान खींचा और इसके बाद उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। आगे चलकर वह अभिनेता के साथ-साथ शानदार संवाद लेखक और पटकथा लेखक भी बने।
सान्या मल्होत्रा: बॉलीवुड से पहले डांस सिखाती थीं
'दंगल' से बॉलीवुड में कदम रखने वाली सान्या मल्होत्रा भी मनोरंजन की दुनिया में आने से पहले डांस टीचर रह चुकी हैं। डांस के प्रति उनका जुनून उनके फिल्मी सफर में भी दिखाई देता है और अभिनय के साथ उनकी डांसिंग स्किल्स ने भी उन्हें अलग पहचान दिलाई।
नंदिता दास: शिक्षा से जुड़ा रहा गहरा रिश्ता
अभिनेत्री और फिल्ममेकर नंदिता दास ने दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क से मास्टर्स करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने आंध्र प्रदेश के ऋषि वैली स्कूल में शिक्षक और निदेशक के तौर पर जिम्मेदारी निभाई। बाद में उनका सफर अभिनय और फिल्म निर्देशन की ओर बढ़ा।
उत्पल दत्त: फिल्मों के साथ पढ़ाते भी रहे
दिग्गज अभिनेता उत्पल दत्त का नाम भी उन कलाकारों में आता है जिनका रिश्ता शिक्षा से रहा। वह कोलकाता के साउथ पॉइंट हाई स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाते थे। दिलचस्प बात यह है कि अभिनय में सक्रिय रहने के बावजूद उनका शिक्षण से जुड़ाव बना रहा।
जब 'गुरु' बनने का अनुभव आया काम
इन सितारों की कहानियां यह बताती हैं कि बॉलीवुड तक पहुंचने का रास्ता हमेशा कैमरे और ऑडिशन से शुरू नहीं होता। किसी ने बच्चों को मार्शल आर्ट्स सिखाते हुए अपना पहला मौका पाया, किसी ने क्लासरूम में पढ़ाते हुए अभिनय का सपना जिंदा रखा और किसी ने प्रोफेसर की नौकरी से निकलकर फिल्मों की दुनिया में कदम रखा।
शायद यही वजह है कि शिक्षक और कलाकार के बीच एक गहरा रिश्ता है—दोनों का काम लोगों पर अपनी छाप छोड़ना है। फर्क सिर्फ इतना है कि एक क्लासरूम में जिंदगी के सबक सिखाता है और दूसरा पर्दे पर उन्हीं जज्बातों को किरदारों के जरिए जीना सिखाता है।इस फीचर में मैंने कियारा को “नर्सरी टीचर” और अक्षय को “मार्शल आर्ट्स टीचर” के रूप में अलग-अलग स्पष्ट किया है, ताकि दोनों के अनुभव को एक जैसा बताने की तथ्यात्मक गलती न हो।






