90's का वो शो, जिसके शुरू होते ही खाली हो जाती थीं सड़कें, बच्चों ने इसी से सीखी हिंदी, दूरदर्शन से विवाद के ब

90 के दशक में इस टीवी शो का ऐसा जलवा था कि प्रसारण के समय सड़कें तक खाली नजर आती थीं। बच्चों से लेकर बड़ों तक में इसे देखने की दीवानगी थी। खास बात यह कि शो ने कई लोगों को हिंदी पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित किया, लेकिन दूरदर्शन से विवाद के बाद इसका सफर अचानक थम गया।

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90 के दशक में जब टीवी मनोरंजन के लिए घरों में दूरदर्शन ही सबसे बड़ा माध्यम था, तब एक फैंटेसी सीरियल ने दर्शकों के बीच ऐसी दीवानगी पैदा की कि उसके प्रसारण के समय गलियां और सड़कें तक सुनसान नजर आती थीं। यह शो था ‘चंद्रकांता’, जो 1994 में दूरदर्शन पर शुरू हुआ और देवकीनंदन खत्री के मशहूर उपन्यास पर आधारित था।

हिंदी पढ़ने की बढ़ी दिलचस्पी

‘चंद्रकांता’ की लोकप्रियता सिर्फ टीवी स्क्रीन तक सीमित नहीं रही। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खत्री के उपन्यास ने कई लोगों को हिंदी पढ़ने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि वे कहानी और उसके रहस्यमयी किरदारों को समझने के लिए किताब तक पहुंचने लगे थे। टीवी पर सीरियल आने के बाद चंद्रकांता, वीरेंद्र सिंह, क्रूर सिंह और अय्यार जैसे किरदार घर-घर में चर्चा का विषय बन गए।

इरफान खान भी थे हिस्सा

सीरियल की स्टारकास्ट भी बेहद खास थी। शिखा स्वरूप ने चंद्रकांता, शहबाज खान ने वीरेंद्र विक्रम सिंह और अखिलेंद्र मिश्रा ने क्रूर सिंह का किरदार निभाया। बाद में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता बने इरफान खान भी इसमें नजर आए। उन्होंने बद्रीनाथ और सोमनाथ नाम के जुड़वां किरदार निभाए थे।

दूरदर्शन से हुआ विवाद

शो की लोकप्रियता के बावजूद इसके प्रसारण को लेकर दूरदर्शन और निर्माताओं के बीच विवाद हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, दूरदर्शन ने 1995 में शो को 52 और एपिसोड की मंजूरी दी थी, लेकिन शर्त रखी थी कि दर्शक संख्या और विज्ञापन आय पर्याप्त न रहने पर चार सप्ताह के नोटिस के साथ प्रसारण रोका जा सकता है।

मार्च 1996 में दूरदर्शन ने विज्ञापन स्पॉट घटने और भविष्य के एपिसोड की रूपरेखा समय पर न मिलने का हवाला देते हुए शो को चार और एपिसोड में खत्म करने का निर्देश दिया। आखिरी एपिसोड 21 अप्रैल 1996 को निर्धारित किया गया था। निर्माताओं ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने दूरदर्शन के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया।

यही वजह है कि ‘चंद्रकांता’ आज भी 90 के दशक के उन टीवी शोज में गिना जाता है, जिसने मनोरंजन के साथ हिंदी साहित्य और टेलीविजन की दुनिया को भी नई पहचान दी।

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