Life Success story: पिता कि मेहनत देख बेटा भी नहीं हैं पीछे! कभी 6 रु.में पूरे दिन काम करते थे पिता! अब बेटा एक घंटे में कमाता है ढेढ़ करोड़
धीरूभाई अंबानी को अबतक का सबसे जीनियस बिजनेसमैन माना जाता है। इंडियन कॉरपोरेट वर्ल्ड में अक्सर यह बात कही जाती है कि अगर बिजनेस करना है तो धीरूभाई से सीखें। बहुत कम लोगों को पता होगा कि धीरूभाई अंबानी नौकरी के लिए यमन गए थे जहां उनकी शुरूआती मंथली सैलरी 200 रुपए थी जो दिन [...]
धीरूभाई अंबानी को अबतक का सबसे जीनियस बिजनेसमैन माना जाता है। इंडियन कॉरपोरेट वर्ल्ड में अक्सर यह बात कही जाती है कि अगर बिजनेस करना है तो धीरूभाई से सीखें। बहुत कम लोगों को पता होगा कि धीरूभाई अंबानी नौकरी के लिए यमन गए थे जहां उनकी शुरूआती मंथली सैलरी 200 रुपए थी जो दिन के हिसाब से उनकी कमाई 6 रुपए के करीब होती थी। वहीं अब उनके बड़े बेटे मुकेश अंबानी आज डेली के हिसाब से करीब 34 करोड़ रुपए कमाते हैं। हर सेकंड इतना कमाते है मुकेश अंबानी….
Life Success story: वित्त वर्ष 2015-16 में मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को कुल 27630 करोड़ रुपए का सालाना प्रॉफिट हुआ। कंपनी में बतौर प्रमोटर उनकी हिस्सेदारी 44.7% है। इस हिसाब से प्रॉफिट में उनका हिस्सा 12351 करोड़ हुआ। डेली के हिसाब से ये कमाई करीब 34 करोड़ रुपए है। वहीं, हर घंटे की बात करें तो ये कमाई 1.41 करोड़ रुपए। हर मिनट 2.35 लाख और हर सेकंड 3916 रुपए कमाई करते हैं मुकेश अंबानी।
इधर किया था पहला जॉब
धीरूभाई की पहली जॉब की बात करें तो 1949 में 17 वर्ष की उम्र में काबोटा नामक शिप से वे यमन के एडेन शहर पहुंचे थे। यहां उनके बड़े भाई रमणिकलाल ने उनके लिए सारी व्यवस्थाएं कर रखी थीं, इसलिए उन्हें वहां कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन धीरूभाई के मन में कुछ और ही चल रहा था। इसलिए 1954 में वे वतन वापस आ गए। सन् 1955 में किस्मत आजमाने मुंबई पहुंच गए और यहीं से शुरू हुई उनकी व्यावसायिक यात्रा। यहां से धीरूभाई अंबानी ने ऐसे कदम बढ़ाए कि फिर कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। धीरूभाई अंबानी सिर्फ 500 रुपए लेकर मुंबई आए थे। 6 जुलाई 2002 को जब उनकी मौत हुई तब तक रिलायंस 62 हजार करोड़ की कंपनी बन चुकी थी।
धीरूभाई के पिता थे प्राइमरी स्कूल टीचर
रिलायंस इंडस्ट्रीज की नींव धीरूभाई अंबानी ने रखी थी। धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1933 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ जिले में हुआ था। इनका पूरा नाम धीरजलाल हीराचंद अंबानी था। धीरूभाई ने जब बिजनेस की दुनिया में कदम रखा तो न उनके पास न तो पुश्तैनी संपत्ति थी और न ही बैंक बैलेंस। उनके पिता हीराचंद एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे। धीरूभाई के निधन के बाद उनकी संपत्ति बंटवारे में उनकी पत्नी कोकिलाबेन ने ही मुख्य भूमिका अदा की थी।
बीच में छोड़ी पढ़ाई
आर्थिक तंगी के कारण धीरूभाई को हाईस्कूल के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ गई थी। उन्होंने बचपन में ही परिवार की आर्थिक मदद करनी शुरू कर दी थी। इस समय वे गिरनार (गुजरात का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल) के पास भजिए की दुकान लगाया करते थे, दुकान की आय यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या पर सीमित थी।
300 रुपये महीने पर करते थे काम
बिजनेस की दुनिया में कदम रखने से पहले धीरुभाई के पास न तो बड़ा नाम था, न पैसे और न ही सही राह दिखाने वाला कोई। घर की आर्थिक हालत को देखते हुए साल 1949 में धीरु अपने भाई रमणिकलाल के पास यमन चले गए। उस वक्त उनकी उम्र केवल 17 साल की थी। यमन पहुंचकर उन्होंने ए बस्सी एंड कंपनी के एक पेट्रोल पंप पर नौकरी की जहां हर महीने उन्हें 300 मिलने लगे।धीरुभाई अपने काम में इतने माहिर थे कि उन्हें जल्द ही फिलिंग स्टेशन में मैनेजर बना दिया गया।
पांच साल तक यमन में रहने के बाद साल 1954 में धीरू भारत आ गए. भारत आने के बाद धीरू नौकरी नहीं करना चाहते थे। उन्हें तो इतिहास रचना था। यही कारण है कि उन्होंने मेहनत का दामन कभी नहीं छोड़ा और ऐसा मुकाम हासिल किया कि 62,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक बन गए।