पंकज त्रिपाठी को एक्टर नहीं बल्कि डाॅक्टर बनाना देखना चाहते थे उनके पिता, इंटरव्यू में किया खुलासा
पकंज त्रिपाठी बाॅलीवुड के सबसे टैलेटंड एक्टर माने जाते हैं। उन्हें काफी शांत स्वभाव का इंसान माना जाता है। पंकज ने काफी संघर्ष करके बाॅलीवुड इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई है। उनके पिता का सपना था कि पढ़ाई कर डाॅक्टर बनूं। लेकिन वें एक एक्टर बने। इसका खुलासा उन्होंने खुद ने हाल ही म
पकंज त्रिपाठी बाॅलीवुड के सबसे टैलेटंड एक्टर माने जाते हैं। उन्हें काफी शांत स्वभाव का इंसान माना जाता है। पंकज ने काफी संघर्ष करके बाॅलीवुड इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई है। उनके पिता का सपना था कि पढ़ाई कर डाॅक्टर बनूं। लेकिन वें एक एक्टर बने। इसका खुलासा उन्होंने खुद ने हाल ही में दिए इंटरव्यू किया। आईये जानते है इस किस्से के बारे में।
पिता का सपना था डाॅक्टर बने
उन्होंने बताया कि उनके पिता का सपना था कि मैं डाॅक्टर बनू। इसको लेकर उन्होंने कहा कि मैं स्पोर्ट्स में बहुत अच्छा रहा हूं लेकिन पढ़ाई में हाथ तंग था। किसी भी क्लास में मैं फर्स्ट नहीं आया हूं। हमेशा दूसरे नंबर या उसके बाद के रैंक पर ही रहा हूं। हालांकि बाबू जी के अरमान मुझे लेकर बहुत बड़े थे।
वो चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूं। उनके इस सपने को पूरा करने के लिए मैंने 12वीं की पढ़ाई बायोलॉजी से पटना एक कॉलेज से की थी। इसके बाद मैंने मेडिकल की आगे की पढ़ाई के लिए पेपर दिया था, लेकिन उसे क्लियर नहीं कर पाया था। इस कारण 12वीं के बाद पढ़ाई पर विराम लग गया।
नेशनल अवार्ड पाना सबसे भावुक पल
पंकज ने हाल ही में एक डिजिटल प्लेटफॉर्म को दिए इंटरव्यू में कहा कि बचपन में मैंने कोई फिल्म नहीं देखी थी । थिएटर कैसे होता है ये भी नहीं जानता था। एक बार बाबू जी पास के शहर में बसंत टॉकीज के उद्घाटन की पूजा करने गए थे। मुझे भी अपने साथ ले गए थे। तब मैंने पहली बार सिनेमाहॉल देखा था। तब तो मन में दूर-दूर तक इस बात का ख्याल नहीं था कि एक दिन मैं भी सिनेमाहॉल के पर्दे पर दिखूंगा।
हालांकि अब वह बहुत बड़ एक्टर बन गए हैं और उन्हें हाल ही में नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसको लेकर इसको उन्होंने जिंदगी का सबसे भावुक पल बताया। उन्होंने कहा कि जिंदगी के सबसे भावुक पल की बात करूं, तो जब मुझे पहली बार फिल्म न्यूटन के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था। ये मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल था। जब अभी फिल्म मिमी के लिए दूसरी बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है। बाबू जी अगर होते तो बहुत खुश होते। उन्हें नेशनल अवॉर्ड बहुत पसंद था, क्योंकि ये देश का सम्मान है। उन्हीं को ये अवॉर्ड समर्पित है।