Pink Ball Test: भारत में क्यों नहीं खेले जाएंगे डे नाइट टेस्ट? जय शाह ने बताई फैंस से जुड़ी खास बात

टेस्ट क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें से एक पिंक बॉल टेस्ट भी है। वनडे की तरह टेस्ट के लिए भी दर्शकों को आकर्षित करने के इरादे से आईसीसी ने पिंक बॉल से डे-नाइट टेस्ट की शुरुआत की थी। Jay Shah on Pink Ball Test: इस टेस्ट में रेड [...]

By Shaikh Almina · 15/8/2024

टेस्ट क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें से एक पिंक बॉल टेस्ट भी है। वनडे की तरह टेस्ट के लिए भी दर्शकों को आकर्षित करने के इरादे से आईसीसी ने पिंक बॉल से डे-नाइट टेस्ट की शुरुआत की थी।

Jay Shah on Pink Ball Test: इस टेस्ट में रेड की जगह पिंक बॉल का इस्तेमाल होता है ताकि दूधिया रोशनी में गेंद को देखने में खिलाड़ियों को परेशानी न हो। वहीं, भारत पिंक बॉल टेस्ट की मेजबानी के पक्ष में नहीं है। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने साफ कर दिया कि क्रिकेट बोर्ड आगे भी भारत में डे-नाइट टेस्ट कराने के पक्ष में नहीं है।

बीसीसीआई सचिव ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा, भारत में पिंक बॉल टेस्ट 2 दिन में ही खत्म हो जाते हैं। नतीजतन, दर्शकों और प्रसारकों को नुकसान होता है। हमें भावनाओं को भी देखना होगा। एक प्रशंसक के तौर पर आप क्रिकेट मैच देखने जाते हैं और पांच दिन का टिकट खरीदते हैं, लेकिन खेल दो-तीन दिन में ही खत्म हो जाता है। कोई रिफंड नहीं होता। इसलिए, मैं इस मामले में थोड़ा भावुक हूं।”

भारत में नहीं होंगे पिंक बॉल टेस्ट

भारत ने पिछली बार 2022 में श्रीलंका के खिलाफ बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में डे-नाइट टेस्ट की मेजबानी की थी। ये मुकाबला तीन दिन में ही खत्म हो गया था और भारत ने 238 रन से मुकाबला जीता था। तब से, बीसीसीआई पिंक बॉल से मैच आयोजित करने से कतरा रहा। बीसीसीआई ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ पिछली दो सीरीज में कोई भी डे-नाइट टेस्ट आयोजित नहीं किया था।

भारत में अबतक तीन डे-नाइट टेस्ट खेले गए हैं और तीनों ही तीन दिन से अधिक नहीं चले जबकि अहमदाबाद में खेले गए एक टेस्ट का नतीजा सिर्फ़ दो दिन में ही आ गया था। इसी वजह से जय शाह ने मुकाबलों के जल्दी खत्म होने को क्रिकेट फैंस के लिए अच्छा नहीं बताया। भारत को डे/नाइट टेस्ट में इकलौती हार एडिलेड में मिली थी। जहां टीम इंडिया 36 रन पर ढेर हो गई थी, जो 87 वर्षों में टीम का सबसे कम स्कोर था।

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