नाना पाटेकर ने प्रोड्यूसर को 2 घंटे रखा खड़ा, पत्नी को कैंसर हुआ तो बने ढाल, शिवाजी साटम ने सुनाए किस्से

बॉलीवुड अभिनेता शिवाजी साटम ने नाना पाटेकर से जुड़े ऐसे किस्से साझा किए, जिन्हें सुनकर आप भी भावुक हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि कैसे नाना ने एक प्रोड्यूसर को दो घंटे तक खड़ा रखा था और जब उनकी पत्नी कैंसर से जूझ रही थीं, तब वह उनके लिए मजबूत सहारा बनकर खड़े रहे। नाना के सख्त मिजाज के पीछे छिपी संवेदनशीलता और दोस्ती की यह कहानी उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने लाती है।

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नाना पाटेकर ने प्रोड्यूसर को 2 घंटे रखा खड़ा, पत्नी को कैंसर हुआ तो बने ढाल, शिवाजी साटम ने सुनाए किस्से

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अपनी दमदार अदाकारी के साथ-साथ अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक ऐसा पहलू भी था, जो उनकी दोस्ती और दूसरों के लिए खड़े होने के जज्बे को दिखाता है। हाल ही में अभिनेता शिवाजी साटम ने नाना से जुड़ी पुरानी यादें साझा कीं। इन किस्सों में कहीं दोस्त के हक के लिए लड़ने वाला नाना नजर आया, तो कहीं मुश्किल वक्त में परिवार की तरह साथ निभाने वाला इंसान।

दोस्त को कम पैसे मिले तो प्रोड्यूसर को कर दिया खड़ा

मुंबई में नाना पाटेकर की याद में आयोजित श्रद्धांजलि सभा ‘आठवणीतले नाना’ में शिवाजी साटम ने अपनी करीब 40 साल पुरानी दोस्ती के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्मों में कदम रखने के लिए नाना ने उन्हें प्रोत्साहित किया था। उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘यशवंत’ थी, जिसमें वह एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाने को लेकर शुरुआत में हिचकिचा रहे थे। नाना के समझाने पर आखिरकार उन्होंने फिल्म के लिए हामी भर दी।

शिवाजी के मुताबिक, शूटिंग पूरी होने के बाद जब नाना को पता चला कि उन्हें कितनी फीस मिली है, तो वह नाराज हो गए। उन्हें लगा कि उनके दोस्त को मेहनत के मुताबिक पैसे नहीं मिले। शिवाजी ने नाना को प्रोड्यूसर से बात करने से मना भी किया, लेकिन वह नहीं माने। उन्होंने प्रोड्यूसर को बुलाकर करीब दो घंटे तक खड़ा रखा और अपनी नाराजगी जाहिर की। यह किस्सा बताता है कि नाना अपने दोस्तों के हक के मामले में कितने गंभीर थे।

पत्नी को कैंसर हुआ तो नाना ने निभाया सगे भाई का फर्ज

शिवाजी साटम ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर का जिक्र करते हुए बताया कि फिल्म ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ की शूटिंग के दौरान उनकी पत्नी को कैंसर होने का पता चला था। परिवार की इस परेशानी के बीच उनके लिए शूटिंग जारी रखना मुश्किल हो गया था। उन्होंने नाना से फिल्म छोड़ने की बात कही, लेकिन नाना ने उन्हें अकेले संघर्ष नहीं करने दिया।

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शिवाजी के अनुसार, नाना ने निर्देशक पार्थो घोष और फिल्म से जुड़े लोगों से बात की। इसके बाद उनके शूटिंग शेड्यूल में बदलाव किया गया, ताकि वह दोपहर 12 बजे सेट पर आकर रात 8 बजे तक घर लौट सकें और पत्नी की देखभाल कर सकें।

इस मदद को याद करते हुए शिवाजी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि नाना ने उनके लिए इतना कुछ किया, जितना शायद उनका सगा भाई भी नहीं कर पाता।

सेट पर मस्ती और दोस्ती के अनगिनत किस्से

शिवाजी ने नाना के साथ बिताए खुशनुमा पलों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच कभी नोकझोंक होती थी, तो कभी सेट पर क्रिकेट खेलते हुए खूब मस्ती होती थी। नाना अचानक फोन करके उन्हें अपने फार्म पर भी बुला लेते थे।

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शिवाजी की बातें बताती हैं कि नाना की दोस्ती केवल शब्दों तक सीमित नहीं थी। वह जरूरत पड़ने पर अपने दोस्तों के लिए खड़े होते थे और उनकी परेशानियों को अपना समझते थे। उनके जाने के बाद ये यादें उनके करीबियों के लिए अनमोल बन गई हैं।

नाना पाटेकर की यही छवि अब लोगों के दिलों में जिंदा है—एक बेबाक कलाकार, जो अपने दोस्तों के लिए ढाल बनना जानता था।

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