नाना पाटेकर के निधन पर तनुश्री दत्ता का तीखा बयान, बोलीं- कोई मर गया तो क्या उसके कांड भूल जाएं?
नाना पाटेकर के निधन की खबर के बीच तनुश्री दत्ता का एक वीडियो चर्चा में है, जिसमें वह पुराने विवादों और अपने आरोपों को लेकर सवाल उठाती नजर आ रही हैं। उनके बयान 'कोई मर गया तो क्या उसके कांड भूल जाएं?' ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
नाना पाटेकर के निधन पर तनुश्री दत्ता का तीखा बयान, बोलीं- कोई मर गया तो क्या उसके कांड भूल जाएं?
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद जहां फिल्म इंडस्ट्री में शोक का माहौल है, वहीं अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के एक वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। तनुश्री ने सोशल मीडिया पर मिल रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के निधन का मतलब यह नहीं है कि उसके कथित गलत कामों को भुला दिया जाए। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
'कोई इंसान मर गया, इसका मतलब यह नहीं कि उसके कांड भूल जाएं'
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तनुश्री दत्ता ने इंस्टाग्राम लाइव के दौरान नाना पाटेकर का नाम लिए बिना अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के साथ अलग-अलग लोगों के अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन वह अपने अनुभवों को अच्छी तरह जानती हैं। अभिनेत्री ने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो क्या उससे जुड़े आरोप और कथित गलतियां अपने आप खत्म हो जाती हैं? उन्होंने यह भी कहा कि माफी की बात करने से पहले गलती स्वीकार करना और पश्चाताप करना जरूरी है।
मीटू विवाद का फिर हुआ जिक्र
तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर के बीच विवाद साल 2018 में सुर्खियों में आया था। अभिनेत्री ने आरोप लगाया था कि 2008 में फिल्म 'हॉर्न ओके प्लीज' की शूटिंग के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ। इस विवाद ने भारत में मीटू आंदोलन को चर्चा के केंद्र में ला दिया था। नाना पाटेकर ने आरोपों से इनकार किया था। मामले में दर्ज शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर केस बंद कर दिया था।
बयान पर बंटी लोगों की राय
तनुश्री के ताजा वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके अनुभवों और अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स ने निधन के मौके पर उनकी टिप्पणी को अनुचित बताया है। ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने भी उनके बयान की आलोचना की है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि किसी शख्स के निधन के बाद उसके जीवन से जुड़े विवादों और कथित गलतियों पर चर्चा कैसे की जानी चाहिए।