Success Story: कभी झुग्‍गी बस्‍ती में रहकर सड़क पर बेचीं किताबें, आज खड़ा किया हैं दुबई में करोड़ों का कारोबारी साम्राज्‍य!

रिजवान साजन ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से अपने आप को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वह आज दुबई के सबसे अमीर भारतीयों में से एक हैं। लेकिन, कभी उन्‍होंने झुग्‍गी-बस्‍ती में रहकर सड़क पर किताबें बेची हैं। आइए, यहां उनके बारे में जानते हैं। Life Success Story: आज हम आपको ऐसे शख्‍स से मि

By Shaikh Almina · 1/6/2024

रिजवान साजन ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से अपने आप को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वह आज दुबई के सबसे अमीर भारतीयों में से एक हैं। लेकिन, कभी उन्‍होंने झुग्‍गी-बस्‍ती में रहकर सड़क पर किताबें बेची हैं। आइए, यहां उनके बारे में जानते हैं।

Life Success Story: आज हम आपको ऐसे शख्‍स से मिलाते हैं जिनकी गिनती दुबई के सबसे अमीर भारतीयों में होती है। उनका नाम है रिजवान साजन। उन्‍होंने गरीबी से उठकर अमीरी का स्‍वाद चखा है। कभी मायानगरी मुंबई में झुग्‍गी-बस्‍ती में रहते हुए र‍िजवान ने सड़कों पर किताबें बेची हैं। अब वह डेन्यूब ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प के बल पर उन्होंने अपने जीवन को शीर्ष पर पहुंचाया। रिजवान साजन की कहानी लाखों लाख लोगों को प्रेरणा देती है।

रिजवान साजन अनिवासी भारतीय व्यवसायी हैं। वह संयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) में रहते हैं। उनका डेन्यूब ग्रुप एक अरब डॉलर का है। डेन्यूब ग्रुप यूएई का बहुराष्ट्रीय समूह है। इसका मुख्यालय दुबई में है। यह विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करता है। डेन्यूब ग्रुप निर्माण सामग्री का प्रमुख सप्‍लायर है। इसमें सीमेंट, रेत, बजरी, स्टील और लकड़ी शामिल हैं। यह समूह प्री-फैब्रिकेटेड इमारतों, रियल एस्टेट डेवलपमेंट और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी शामिल है। ग्रुप यूएई, ओमान, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और भारत में कारोबार करता है।

मुंबई में हुआ जन्‍म

र‍िजवान साजन का जन्म मुंबई के एक गरीब परिवार में हुआ था। शुरुआती दिनों में वह सड़क पर किताबें और पटाखे बेचते थे। परिवार को सहारा देने के लिए उन्‍होंने दूध भी बेचा। वह पहली पीढ़ी के व्‍यवसायी हैं। जब र‍िजवान सिर्फ 16 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उन्‍होंने 1981 में कुवैत में अपने चाचा की निर्माण सामग्री की दुकान पर काम करना शुरू किया।

1991 में वापस लौटे भारत

एक सेल्समैन के रूप में शुरुआत करते हुए रिजवान तेजी से आगे बढ़ने लगे। हालांकि, 1991 में खाड़ी युद्ध ने उन्हें मुंबई लौटने के लिए मजबूर कर दिया। 1993 में साजन ने डेन्यूब ग्रुप की स्थापना की, जो बाद में कई तरह के कारोबार में फैल गया।

सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत को देते हैं

साजन हमेशा कहते रहते हैं कि उनके पास अपने सपनों को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत के अलावा कोई विकल्प नहीं था। एक स्ट्रीट वेंडर से अरबपति बनने तक का उनका सफर उनकी दृढ़ता और समर्पण का सबूत है।

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