राम मंदिर की तस्वीर को एडिट कर लगाया इस्लामी झंडा, कर्नाटक में युवक को किया गया गिरफ्तार

एक तरफ पूरा देश राम मय होकर प्राण प्रतिष्ठा में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ शरारती तत्व अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कर्नाटक से सामने आया है, जहां युवक को गिरफ्तार किया गया है। Ram Mandir Consecration Day: कर्नाटक के गदग जिले के रहने वाले ताजुद्दीन दाफेदार नाम [

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एक तरफ पूरा देश राम मय होकर प्राण प्रतिष्ठा में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ शरारती तत्व अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कर्नाटक से सामने आया है, जहां युवक को गिरफ्तार किया गया है।

Ram Mandir Consecration Day: कर्नाटक के गदग जिले के रहने वाले ताजुद्दीन दाफेदार नाम के एक व्यक्ति को गजेंद्रगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस पर आरोप है कि राम मंदिर की तस्वीर को एडिट करके उस पर इस्लामी झंडा लगा दिया और फिर इसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर पोस्ट कर दिया। इससे अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा से पहले हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंची। हिंदूवादी संगठनों ने जब इस पोस्ट के लिए पुलिस को अलर्ट किया तो युवक को गिरफ्तार कर लिया गया और फर्जी पोस्ट हटाने को कहा गया।

हिंदू संगठनों ने की पुलिस से शिकायत

गडग जिला पुलिस ने शिकायत मिलने के तुरंत ताजुद्दीन दफेदार को गिरफ्तार कर लिया और आपत्तिजनक पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया। पुलिस विभाग ने झूठी सूचना फैलाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का वादा करते हुए जनता को मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है।

तमिलनाडु सरकार के ऑर्डर पर रोक

तमिलनाडु सरकार ने राम मंदिर कार्यक्रम के लाइव टेलीकास्ट पर रोक का ऑर्डर दिया तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से न सिर्फ जवाब मांगा बल्कि यह भी कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग से सिर्फ इस वजह रोक नहीं लगाई जा सकती कि यह दूसरे समुदाय का कार्यक्रम है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लाइव प्रसारण पर से रोक हटा ली गई है।

तमिलनाडु सरकार ने नोटिस जारी कर कहा था कि राम मंदिर कार्यक्रम के लिए न तो एलईडी लगाई जा सकती है और न ही लाइव प्रसारण किया जाएगा। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह कहा कि किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है और सभी लोग पूजा अर्चना कर सकती हैं। कहा कि पूजा, अर्चना, भजनों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और यह याचिका राजनीति से प्रेरित है।

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