‘बेमेल दूल्हा’ शिव और जिद पर अड़ी पार्वती! ‘हनुमान अंश’ के इस गाने की कहानी जानकर चेहरे पर आ जाएगी मुस्कान
‘हनुमान अंश’ के इस खास गाने में शिव-पार्वती के रिश्ते की बेहद दिलचस्प झलक देखने को मिलती है। जब पार्वती भोलेनाथ को ‘बेमेल दूल्हा’ कहकर अपनी जिद पर अड़ जाती हैं, तो इस प्यारी कथा का मतलब जानकर आप भी मुस्कुरा देंगे।
‘हनुमान अंश’ का बुंदेली भजन ‘पार्वती’ इन दिनों अपने मजेदार बोल और अनोखे अंदाज के कारण चर्चा में है। गाने में शिव-पार्वती की उस पौराणिक कथा को बेहद दिलचस्प तरीके से पेश किया गया है, जब माता पार्वती भगवान शिव को अपना वर चुनने की जिद पर अड़ जाती हैं।
‘बेमेल दूल्हा’ क्यों लगे शिव?
गाने की शुरुआत में बताया जाता है कि पार्वती की जिद देखकर सप्तऋषि उन्हें समझाने पहुंचते हैं। उनका तर्क है कि आखिर पार्वती ऐसे वर के लिए क्यों तप कर रही हैं, जो देखने में बिल्कुल साधारण दूल्हे जैसा नहीं लगता। शिव के सिर पर गंगा विराजमान है, गले में सांप हैं और उनका रहन-सहन भी सांसारिक सुख-सुविधाओं से बिल्कुल अलग है।
गाने में बुंदेली अंदाज में शिव की यही तस्वीर थोड़े हास्य और अपनापन के साथ दिखाई गई है। उनके जटाधारी रूप, सिर पर चंद्रमा और वैरागी जीवन का जिक्र करते हुए सवाल किया जाता है कि जो महादेव गृहस्थ जीवन से दूर रहने वाले हैं, उन्हें पार्वती आखिर अपना वर क्यों बनाना चाहती हैं?
पार्वती को नहीं बदला अपना फैसला
सप्तऋषियों के तमाम तर्कों के बावजूद पार्वती का संकल्प नहीं बदलता। यही इस भजन की सबसे खूबसूरत बात है—यह सिर्फ शिव के रूप का मजाकिया वर्णन नहीं करता, बल्कि पार्वती के अटूट प्रेम और दृढ़ संकल्प को भी सामने लाता है।
भजन के बुंदेली शब्द इसे और खास बनाते हैं। ‘काय’ का अर्थ ‘क्यों’, ‘रईं’ का अर्थ ‘रहीं’ और ‘खों’ का अर्थ ‘के लिए’ बताया गया है।
सोशल मीडिया पर भी छाया गाना
‘पार्वती’ को साधु एस. तिवारी ने गाया और लिखा है। गाने के बोलों की सरलता, बुंदेली लोक रंग और शिव-पार्वती की प्यारी नोकझोंक ने इसे दर्शकों के बीच खास बना दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इस भजन पर रील्स भी बना रहे हैं।
यानी ‘हनुमान अंश’ का यह गाना सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि पार्वती की जिद और शिव के अनोखे व्यक्तित्व की मुस्कुराती हुई कहानी है।