एकता कपूर का बॉलीवुड पर बड़ा आरोप, बोलीं- तिलक-कलावा लगाने पर कहते हैं सनकी और तांत्रिक, इंडस्ट्री में हिंदूफो
टीवी और फिल्म निर्माता एकता कपूर ने बॉलीवुड में हिंदू धर्म और धार्मिक प्रतीकों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने दावा किया कि तिलक लगाने और कलावा बांधने पर उन्हें सनकी और तांत्रिक तक कहा जाता है। उनके इस बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में हिंदूफोबिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
एकता कपूर का बॉलीवुड पर बड़ा आरोप, बोलीं- तिलक-कलावा लगाने पर कहते हैं सनकी और तांत्रिक
टीवी और फिल्म निर्माता एकता कपूर ने बॉलीवुड में धार्मिक आस्था और भारतीय संस्कृति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कथित हिंदूफोबिया पर खुलकर अपनी राय रखी और बताया कि माथे पर तिलक लगाने तथा हाथ में कलावा या धार्मिक धागा पहनने पर उन्हें भी लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ा। एकता ने यह बातें रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान कहीं।
तिलक और कलावा पहनने पर सुनने पड़े ताने
एकता कपूर ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए बताया कि धार्मिक प्रतीकों को अपनाने के कारण लोग उनके पहनावे और आस्था को लेकर सवाल उठाते थे। उन्हें अजीब नजरों से देखा गया और कुछ लोगों ने उन्हें 'सनकी' और 'तांत्रिक' तक कहा। एकता के मुताबिक, माथे पर तिलक लगाना या हाथ में धार्मिक धागा पहनना किसी व्यक्ति को दूसरों से अलग या अजीब साबित करने की वजह नहीं होना चाहिए।
उनकी बातों का मुख्य मुद्दा यह था कि आखिर अपनी धार्मिक पहचान को खुले तौर पर जाहिर करने में परेशानी क्यों होनी चाहिए? एकता ने इस अनुभव को इंडस्ट्री में हिंदू आस्था को लेकर मौजूद कथित पूर्वाग्रह से जोड़कर देखा।
विदेशी फैंटेसी पसंद, लेकिन भारतीय लोककथाओं से परहेज क्यों?
एकता कपूर ने केवल अपने निजी अनुभवों की बात नहीं की, बल्कि फिल्मों में भारतीय संस्कृति और पौराणिक कहानियों को मिलने वाली जगह पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि मनोरंजन जगत विदेशी फैंटेसी और एनिमेशन की कहानियों को सहजता से स्वीकार करता है, लेकिन जब भारतीय लोककथाओं और हिंदू पौराणिक मान्यताओं को पर्दे पर दिखाने की बात आती है, तो वैसा उत्साह नजर नहीं आता। उन्होंने इस रवैये को हिंदूफोबिया बताते हुए भारतीय कहानियों को भी उचित सम्मान देने की बात कही।
मंदिर से क्लब जाने पर भी लोगों ने जताई हैरानी
पॉडकास्ट में एकता ने एक और दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार वह मंदिर जाने के बाद सीधे क्लब पहुंची थीं। इस पर लोगों ने उनसे हैरानी से पूछा कि क्या वह मंदिर होकर आई हैं। एकता ने जवाब दिया कि हां, वह मंदिर गई थीं। उनके लिए धार्मिक आस्था और आधुनिक जीवनशैली एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। किसी व्यक्ति का मंदिर जाना और अपनी पसंद के मुताबिक सामाजिक जीवन जीना, दोनों बातें साथ हो सकती हैं।
‘द व्वान’ से जुड़ा है भारतीय लोककथाओं का मुद्दा
एकता कपूर की ये टिप्पणियां उनकी फिल्म ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ को लेकर चर्चा के बीच सामने आई हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अभिनीत यह फिल्म बिहार की लोककथाओं और मां वन देवी से जुड़ी मान्यताओं से प्रेरित है। एकता का जोर इस बात पर है कि भारतीय संस्कृति की कहानियों को भी बड़े पर्दे पर खुलकर दिखाया जाना चाहिए।
उनके बयान के बाद धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व और बॉलीवुड की सोच को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, इंडस्ट्री के सभी लोगों की सोच एक जैसी है, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।