30 Years of Khalnayak: फिल्म में ‘चोली के पीछे’ गाने का लोगों ने निकाला गलत मतलब, निर्देशन सुभाष घई ने दिया शॉकिंग रिएक्शन
30 Years of Khalnayak: बड़े पर्दे की ब्लॉक बस्टर फिल्म ‘खलनायाक’ को रिलीज हुए 30 साल (30 Years of Khalnayak) पूरे हो चुके हैं. फिल्म की स्टोरी लाइन से लेकर गानों और सभी किरदारों के लोग आज भी दीवाने है. लेकिन क्या आप जानते हैं रिलीजिंग से पहले ये फिल्म कई वजहों को लेकर विवादों [..
30 Years of Khalnayak: बड़े पर्दे की ब्लॉक बस्टर फिल्म ‘खलनायाक’ को रिलीज हुए 30 साल (30 Years of Khalnayak) पूरे हो चुके हैं. फिल्म की स्टोरी लाइन से लेकर गानों और सभी किरदारों के लोग आज भी दीवाने है. लेकिन क्या आप जानते हैं रिलीजिंग से पहले ये फिल्म कई वजहों को लेकर विवादों में घिर गई थी. जिसके चलते सभी ने फिल्म को फ्लॉप घोषित कर दिया था. मगर रिलीजिंग के बाद ‘खलनायाक’ की कामयाबी ने सभी के होश उड़ा कर रख दिए थे.
दरअसल ‘खलनायाक’ के 30 साल पूरे होने की खुशी में निर्देशक सुभाष घई ने फिल्म से जुड़े कई बड़े खुलासे किए हैं. उन्होंने बताया कि, जहां एक तरफ फिल्म का गाना ‘चोली के पीछे क्या है’ का लोगों ने गलत मतलब निकालना शुरु कर दिया था. तो वहीं दूसरी तरफ रिलीजिंग के पहले सजंय दत्त को आतंकवादियों का साथ देने के जुर्म में जेल जाना पड़ा था. जिसके चलते ‘खलनायाक’ काफी हद तक कॉन्ट्रोवर्सी का शिकार हो गई थी.
बता दें कि, इस फिल्म में सजंय दत्त ने खलनायक की भूमिका निभाई थी. ऐसे में जहां संजू बाबा फिल्म में विलेन बल्लू बने थे. तो वहीं जैकी श्रॉफ पुलिस ऑफिसर राम और माधुरी दीक्षित अंडरकवर पुलिस ऑफिसर गंगा के रोल में नजर आई थीं. ऐसे में फिल्म की कहानी, गाने और तीन मशहूर सितारों के किरदार ने सीधा लोगों के दिलों पर दस्तक दी थी. मगर सवाल ये है कि, रिलीजिंग से पहले विवादों में घिरी ‘खलनायाक’ आखिर बड़े पर्दे की ब्लॉक बस्टर फिल्म कैसे बन गई?
ऐसे में फिल्म के गाने पर बात करते हुए निर्देशक सुभाष घई बताते हैं कि, ‘चोली के पीछे क्या है’ गाने को लोगों ने अश्लीलता का टैग दे दिया था. जिससे मुझे बड़ा झटका लगा था. हमने इस गाने को एक लोक नृत्य की तरह प्रस्तुत किया था. लेकिन गाना रिलीज होने के बाद लोगों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया और बड़े पैमाने पर लोग प्रोटेस्ट करने लगे थे. इस गाने का लेखन आननंद बक्शी ने किया था. वहीं अल्का यागनिक की आवाज और माधुरी दीक्षित के ठुमकों ने गाने को ऑइकॉनिक बना दिया था. मुझे याद है कि, विवादों के बाद एक बड़े अखबार ने लिखा था कि, ये गाना भारतीय सिनेमा का एक क्लासिक पीस है. जिसके बाद मैंने राहत की सांस ली थी.
वहीं संजय दत्त की गिरफ्तारी पर बात करते हुए सुभाष घई ने बताया कि, खलनायक के रूप में संजय दत्त फिल्म के मुख्य किरदार थे. जो फिल्म में आतंकवादी बने थे. इसी दौरान 1993 में हुए मुंबई हमले में संजय दत्त का नाम सामने आने लगा और TADA अंतर्गत संजू को अरेस्ट कर लिया गया था. जिसके चलते फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बढ़ने लगा था.
सुभाष घई ने बताया कि, किसी ने इसकी कल्पना नहीं की थी. दो महीने बाद फिल्म रिलीज होने वाली थी. ऐसे में लोगों ने फिल्म में संजू के कैरेक्टर को रीयल लाइफ से जोड़ना शुरु कर दिया. वहीं मीडिया ने भी इस मामले को जमकर उछाला था. हालांकि समय बीतने के साथ सभी को अपनी गलती का एहसास हुआ और लोगों ने भी फिल्म को काफी प्यार दिया.