धर्मेंद्र भाई के वीरेंद्र सिंह थे बाॅलीवुड के सुपरस्टार, अचानक बने आतंकवादियों का शिकार

बाॅलीवुड में कई एक्टर ऐसे होते हैं। जिनका शुरूआत में इंडस्ट्री में एक अलग पहचान होती है। लेकिन कुछ समय बाद अचानक वो इंडस्ट्री से गायब हो जाते हैं। जिनके बारे में किसी को कोई खबर भी नहीं होती है। कुछ ऐसा ही हुआ था बाॅलीवुड के एक्टर धर्मेंद्र के भाई के साथ, जो एक [...]

By Amit Rajput · 15/10/2023

बाॅलीवुड में कई एक्टर ऐसे होते हैं। जिनका शुरूआत में इंडस्ट्री में एक अलग पहचान होती है। लेकिन कुछ समय बाद अचानक वो इंडस्ट्री से गायब हो जाते हैं। जिनके बारे में किसी को कोई खबर भी नहीं होती है। कुछ ऐसा ही हुआ था बाॅलीवुड के एक्टर धर्मेंद्र के भाई के साथ, जो एक समय पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के बहुत बड़े सितारे थे लेकिन अचानक से उनकी मौत हो गई और सब उनको भूल गए।

पंजाबी फिल्म के सुपरस्टार थे

धर्मेन्द्र के भाई वीरेंद्र सिंह थे। वीरेंद्र सिंह पंजाबी सिनेमा के बहुत बड़े सुपरस्टार थे। 80 के दशक में वीरेंद्र सिंह का एक तरह से पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री पर राज था। हर निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्म में वीरेंद्र सिंह को ही लेने के लिए अड़ जाता था। वीरेंद्र सिंह न सिर्फ एक बेहतरीन एक्टर थे बल्कि एक सक्सेसफुल डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी रहे।

अपने 12 साल के फिल्मी करियर में वीरेंद्र सिंह ने करीब 25 फिल्में बनाईं और सभी ब्लॉकबस्टर रहीं। सिर्फ पंजाबी ही नहीं वीरेंद्र ने दो हिंदी फिल्में भी बनाईं- ‘खेल मुकद्दर का’ और ‘दो चेहरे’। दोनों ही फिल्में सफल रहीं। वीरेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 1975 में आई फिल्म ‘तेरी मेरी एक जिंदड़ी’ से की थी जिसमें उनके भाई धर्मेंद्र भी नजर आए थे।

आतंकवादियों ने की हत्या

कम ही वक्त में वीरेंद्र सिंह पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के इतने बड़े सुपरस्टार बन गए कि उनकी सफलता से चिढ़ने वालों की फौज खड़ी हो गई। कई लोग वीरेंद्र सिंह की जान की दुश्मन बन बैठी। 1988 की बात है.. उस वक्त वीरेंद्र सिंह फिल्म ‘जट ते जमीन’ की शूटिंग कर रहे थे और शूट के दौरान ही उनकी हत्या कर दी गई। वीरेंद्र की उस हत्या में किन लोगों का हाथ था ये पता नहीं चल पाया, लेकिन कहा जाता है कि उनकी लोकप्रियता ही उनकी जान की दुश्मन बन बैठी थी।

वीरेंद्र सिंह चंद सालों के अंदर ही पंजाबी सिनेमा के राजा बन बैठे और कुछ लोगों से ये बर्दाश्त नहीं हुआ। वहीं ऐसा भी कहा जाता है कि वीरेंद्र सिंह को कुछ आतंकवादियों ने मार दिया था। क्योंकि उस वक्त काफी आतंकी गतिविधियां चल रही थीं। वीरेंद्र सिंह को साफ हिदायत दी गई थी कि ऐसे माहौल में वो शूटिंग न करें, लेकिन वो नहीं माने और ऐसा कहा जाता है कि वो आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गए।

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