आशुतोष राणा बोले- वासनाओं पर विजय पाकर दशरथ से राम बन सकता है इंसान, समझाया रामायण का गहरा अर्थ
अभिनेता आशुतोष राणा ने रामायण के जरिए जीवन, आत्मसंयम और मानवीय वासनाओं पर विजय पाने का गहरा संदेश दिया है। उनके मुताबिक, जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं और वासनाओं पर काबू पा लेता है, वह दशरथ से राम बनने की आध्यात्मिक यात्रा पूरी करता है। उनका यह विचार रामायण के वास्तविक अर्थ को समझने की नई दृष्टि देता है।
आशुतोष राणा बोले- वासनाओं पर विजय पाकर दशरथ से राम बन सकता है इंसान, समझाया रामायण का गहरा अर्थ
बॉलीवुड अभिनेता आशुतोष राणा इन दिनों अपने नाटक ‘हमारे राम’ में रावण की भूमिका को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने रामायण के आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थ को समझाते हुए बताया कि यह महाकाव्य केवल भगवान राम की कथा नहीं, बल्कि हर इंसान के भीतर चलने वाले संघर्ष की कहानी भी है। उनके विचारों में आत्मसंयम, इच्छाओं पर नियंत्रण और खुद को बेहतर बनाने का गहरा संदेश छिपा है।
दशरथ से राम बनने की आध्यात्मिक यात्रा
आशुतोष राणा ने मनुष्य के शरीर और मन को रामायण के पात्रों से जोड़कर इसकी एक अनूठी व्याख्या की। उनके अनुसार, राजा दशरथ पांच ज्ञानेंद्रियों और पांच कर्मेंद्रियों से संचालित होने वाले शरीर के प्रतीक हैं। वहीं, रावण का दशमुख स्वरूप मनुष्य के भीतर मौजूद वासनाओं, इच्छाओं और प्रलोभनों को दर्शाता है।
अभिनेता का मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर दशरथ और दशमुख, दोनों मौजूद हैं। जब इंसान अपनी वासनाओं पर विजय प्राप्त करता है और अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करना सीखता है, तब वह अपने भीतर राम के आदर्शों को स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ता है। य
ही उनके लिए रामायण का वास्तविक अर्थ है।
राम केवल पूजने नहीं, उनके आदर्श अपनाने की जरूरत
आशुतोष राणा के मुताबिक, रामायण और रामलीला की घटनाएं केवल धार्मिक कथाओं तक सीमित नहीं हैं। ये हर व्यक्ति के चित्त, चरित्र और चिंतन में घटित होने वाली घटनाओं का प्रतीक हैं। भगवान राम के भाई लक्ष्मण को उन्होंने लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले मन, भरत को प्रेम और शत्रुघ्न को साहस से जोड़कर समझाया। उनके अनुसार, जब व्यक्ति के भीतर ज्ञान, प्रेम और साहस का संगम होता है, तब उसका जीवन भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।
आज भी प्रासंगिक है रामायण का संदेश
आशुतोष राणा की यह व्याख्या आज के दौर में भी प्रासंगिक है। अक्सर लोग रामायण को केवल पूजा-पाठ या धार्मिक आयोजन तक सीमित कर देते हैं, जबकि इसकी शिक्षाएं रोजमर्रा के जीवन में भी मार्गदर्शन कर सकती हैं। इच्छाओं पर नियंत्रण, अहंकार से दूरी, रिश्तों में प्रेम और अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी जैसे मूल्य हर युग में महत्वपूर्ण हैं।
नाटक ‘हमारे राम’ में रावण की भूमिका निभाने वाले आशुतोष राणा का नजरिया यही बताता है कि राम और रावण का संघर्ष केवल किसी प्राचीन कथा का हिस्सा नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर अच्छाई और बुराई के बीच चलने वाला द्वंद्व भी है। असली बदलाव तब आता है, जब इंसान अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन पर विजय पाने की कोशिश करता है।
आखिरकार, आशुतोष राणा का संदेश यही है कि रामायण को समझने का अर्थ केवल उसकी कथा जानना नहीं, बल्कि उसके मूल्यों को अपने जीवन में उतारना भी है। यही आत्ममंथन इंसान को बेहतर बनने की राह दिखा सकता है।