करियर के पीक पर लकवे का शिकार हुआ ये सुपरस्टार, एक्टिंग छोड़ खड़ा किया ₹3300 करोड़ का साम्राज्य, जानें कहानी
करियर के पीक पर लकवे ने इस सुपरस्टार की जिंदगी बदल दी। बीमारी के चलते एक्टिंग से दूरी बनाई, लेकिन हार नहीं मानी। अपनी मेहनत, सूझबूझ और बिजनेस की बदौलत आज वह करीब 3300 करोड़ रुपये के साम्राज्य का मालिक बन चुका है। आखिर कौन है ये सुपरस्टार और कैसे बदली इसकी किस्मत?
करियर के पीक पर लकवे का शिकार हुए अरविंद स्वामी, एक्टिंग छोड़ खड़ा किया ₹3300 करोड़ का साम्राज्य
साउथ सिनेमा के मशहूर अभिनेता अरविंद स्वामी की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 90 के दशक में अपनी शानदार अदाकारी और आकर्षक व्यक्तित्व से लाखों दिलों पर राज करने वाले अरविंद ने उस वक्त फिल्मों से दूरी बना ली, जब उनका करियर बुलंदियों पर था। लेकिन उनकी जिंदगी में आया एक ऐसा दौर, जिसने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से बड़ी चुनौती के सामने खड़ा कर दिया। गंभीर चोट के कारण उनके एक पैर में लकवा हो गया और उन्हें लंबे समय तक इलाज व रिकवरी से गुजरना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बिजनेस की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
‘रोजा’ और ‘बॉम्बे’ से मिली पहचान
अरविंद स्वामी ने साल 1991 में मणिरत्नम की फिल्म ‘थलपति’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद ‘रोजा’ (1992) और ‘बॉम्बे’ (1995) जैसी फिल्मों ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय के लोग दीवाने थे। एक समय उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि उन्हें साउथ सिनेमा के सबसे चर्चित सितारों में गिना जाने लगा।
बिजनेस की दुनिया में बनाई नई पहचान
फिल्मों से दूरी बनाने के बाद अरविंद ने अपने पारिवारिक कारोबार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने इंटरप्रो ग्लोबल और प्रोलिज इंडिया जैसी कंपनियों में अहम भूमिकाएं निभाईं। साल 2005 में उन्होंने टैलेंट मैक्सिमस नाम की कंपनी की स्थापना की, जो पेरोल प्रोसेसिंग, स्टाफिंग और एचआर सेवाएं प्रदान करती है। इस कंपनी ने कारोबार की दुनिया में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 में कंपनी का राजस्व करीब 3,300 करोड़ रुपये बताया गया था। हालांकि, इस आंकड़े को उनकी निजी संपत्ति समझना सही नहीं होगा।
हादसे ने बदल दी जिंदगी
बिजनेस में आगे बढ़ने के दौरान अरविंद स्वामी को साल 2005 में एक गंभीर हादसे का सामना करना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लगी, जिसके कारण उनका एक पैर आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गया। उन्हें कई वर्षों तक इलाज और पुनर्वास से गुजरना पड़ा। इस मुश्किल दौर में उनकी शारीरिक फिटनेस भी प्रभावित हुई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
12 साल बाद फिल्मों में वापसी
लंबे अंतराल के बाद अरविंद ने 2013 में मणिरत्नम की फिल्म ‘कदल’ से वापसी की। इसके बाद 2015 की फिल्म ‘थानी ओरुवन’ में उनके अभिनय को खूब सराहना मिली। उन्होंने साबित कर दिया कि मुश्किलें किसी इंसान की प्रतिभा को खत्म नहीं कर सकतीं। आज अरविंद स्वामी की कहानी अभिनय, संघर्ष और उद्यमिता के अनोखे मेल की मिसाल है।