‘मंगल रंग’ की आलोचना पर एआर रहमान का अचार वाला जवाब, बोले- वक्त के साथ चीजें दिखाती हैं असली रंग!
फिल्म 'रामायण' के गाने 'मंगल रंग' को लेकर मचे विवाद के बीच संगीतकार एआर रहमान ने अपनी बात रखी है। गाने की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने इसकी तुलना अचार से की और कहा कि कुछ चीजें वक्त के साथ पुरानी होकर अपना असली रंग और स्वाद दिखाती हैं। उनका यह दिलचस्प बयान अब चर्चा में है।
फिल्म ‘रामायण: राइज ऑफ अ लीजेंड’ के गाने ‘मंगल रंग’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस है। कुछ श्रोताओं ने इसके संगीत में कव्वाली जैसा अंदाज महसूस किया, तो कुछ ने इसकी तुलना रहमान के पुराने गाने ‘कुन फाया कुन’ से की। अब एआर रहमान ने आलोचनाओं पर अपनी बात रखी और धुनों की तुलना अचार से की है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए इंटरव्यू में रहमान ने कहा कि वह खुद अपने सबसे बड़े आलोचक हैं। ऐसा नहीं कि उन्हें अपनी बनाई हर चीज पसंद आती है। उनके मुताबिक, धुन तैयार करने में सोच-विचार लगता है और कई बार टीम किसी रचना के साथ महीनों तक रहती है।
अपनी बात समझाने के लिए रहमान ने अचार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कुछ धुनें ऐसी होती हैं, जो जितनी पुरानी होती हैं, उतनी ही बेहतर हो जाती हैं। हर किसी को रचना के पीछे की सोच समझ नहीं आती, लेकिन वक्त के साथ उसका असली रंग सामने आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर टिप्पणी से प्रभावित होना ठीक नहीं। स्टीव जॉब्स का जिक्र करते हुए रहमान ने कहा कि अगर हर किसी को खुश करना है, तो आइसक्रीम बेचनी चाहिए।
‘मंगल रंग’ में रणबीर कपूर और साई पल्लवी राम और सीता के रूप में नजर आते हैं। गाने को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने आवाज दी है, जबकि बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं। इसकी धुन में बिलावल के शुद्ध स्वरों के साथ मांड और पहाड़ी राग के तत्व हैं। रहमान ने भक्ति और पारंपरिक संगीत की अनुभूति अपने अंदाज में पेश करने की कोशिश की है।
गाने को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, लेकिन यह यूट्यूब के ट्रेंडिंग म्यूजिक चार्ट में शीर्ष स्थान तक पहुंचा। फिल्म का संगीत रहमान हॉलीवुड के संगीतकार हंस जिमर के साथ तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि जिमर की मौजूदगी से महाकाव्य की कहानी को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।