नेपाल की तबाही देख छलका मनीषा कोइराला का दर्द, बोलीं- ‘कभी बाढ़, कभी भूकंप, हे भगवान! हमारे साथ ही क्यों?’

नेपाल में भीषण बाढ़ से मची तबाही ने मनीषा कोइराला को भावुक कर दिया। अपने देश की दर्दनाक स्थिति पर उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘कभी बाढ़, कभी भूकंप… हमारे साथ ही क्यों?’ साथ ही उन्होंने नेपाल के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की अपील की।

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नेपाल इन दिनों एक ऐसी प्राकृतिक त्रासदी से जूझ रहा है, जिसने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। भीषण फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। इस संकट को देखकर नेपाली मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला भी भावुक हो गईं। ‘इन सॉलिडैरिटी विद नेपाल’ कार्यक्रम में अपने देश की स्थिति पर बात करते हुए उनकी आंखों से दर्द साफ झलकता नजर आया।

‘कभी बाढ़, कभी भूकंप… हमारे साथ ही क्यों?’

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मनीषा ने नेपाल में बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि कभी भूकंप परिवारों को उजाड़ देता है तो कभी भयानक बाढ़ हजारों लोगों को दर्द में छोड़ जाती है। उन्होंने बताया कि 2015 के भूकंप के बाद जब वह सिंधुपालचोक गई थीं, तो उन्होंने अपनी आंखों के सामने लोगों के टूटे घर और बर्बाद जिंदगी देखी थी। अब रासुवा में हुई तबाही को देखने की भी उनमें हिम्मत नहीं है।

ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़

रिपोर्टों के मुताबिक, इस बार की तबाही नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के बड़े हिस्से के ढहने से शुरू हुई। तेज पानी और मलबे ने नदियों का रुख बदलते हुए नीचे बसे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ ने घरों, सड़कों और पुलों के साथ-साथ बिजली और हाइड्रोपावर ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया। Reuters के अनुसार, करीब 19 पुल और लगभग 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई, जबकि नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता का 10 फीसदी से ज्यादा प्रभावित हुआ।

हजारों परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

इस आपदा का असर सिर्फ जान-माल के नुकसान तक सीमित नहीं है। कई परिवार अपनों की तलाश में हैं, जबकि राहत और बचाव अभियान को खराब मौसम, मलबे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मनीषा ने भी इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के लोगों से हिम्मत जुटाकर धीरे-धीरे आगे बढ़ने की अपील की।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नेपाल का साथ देने और पर्यटन को जारी रखने की भी अपील की, क्योंकि पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

मनीषा का भावुक संदेश सिर्फ एक अभिनेत्री का दर्द नहीं, बल्कि उस देश की पुकार है जो बार-बार प्राकृतिक आपदाओं के बीच अपने लोगों और अपनी उम्मीदों को संभालने की कोशिश कर रहा है।

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