'हनुमान अंश' की अनोखी शूटिंग का किस्सा, गांव में माइक लेकर पहुंचती थी टीम, रखी जाती थी ये खास शर्त
‘हनुमान अंश’ की शूटिंग का अंदाज बेहद अनोखा था। फिल्म की टीम गांवों में माइक लेकर घूमती और स्थानीय लोगों, खासकर बड़े-बुजुर्गों को खास शर्त के साथ शूटिंग में शामिल होने के लिए बुलाती थी।
गांव की गलियों में माइक लेकर पहुंचती थी ‘हनुमान अंश’ की टीम, ऐसे जुटाए जाते थे असली किरदार
नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी ‘हनुमान अंश’ इन दिनों अपनी कहानी और बॉक्स ऑफिस सफलता के साथ-साथ अपनी अनोखी शूटिंग को लेकर भी चर्चा में है। फिल्म के बिहाइंड-द-सीन्स वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें इसकी शूटिंग का बेहद देसी अंदाज देखने को मिलता है।
फिल्म की टीम गांवों में माइक लेकर घूमती थी और लोगों से शूटिंग का हिस्सा बनने की अपील करती थी। खासतौर पर बड़े-बुजुर्गों को धोती-कुर्ता, कुर्ता-पायजामा या सदरी पहनकर आने के लिए कहा जाता था। महिलाओं से साड़ी पहनकर शामिल होने की अपील की जाती थी। टीम बच्चों से भी पूछती थी कि उनके घर में कोई बड़े-बुजुर्ग हैं, ताकि फिल्म के दृश्यों में स्थानीय लोगों को शामिल किया जा सके।
इसका मकसद साफ था—फिल्म के गांव वाले सीन कैमरे पर बनावटी न लगें और उनमें वास्तविकता नजर आए। बड़े सितारों और भारी-भरकम सेट की बजाय स्थानीय लोगों को शामिल करने का यह तरीका फिल्म की जमीन से जुड़ी कहानी के अनुरूप था।
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने शूटिंग के दौरान सेट पर कुछ सख्त नियम भी बनाए थे। उनके मुताबिक, सेट पर गाली-गलौज और तेज आवाज में झगड़े की मनाही थी। शराब और नॉनवेज पर भी रोक थी। हर दिन शूटिंग शुरू और खत्म करने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था।
दिलचस्प बात यह है कि कई बार तकनीकी परेशानियों के कारण सुबह की शूटिंग घंटों देर से शुरू होती थी। ऐसे समय में टीम हनुमान चालीसा का पाठ करती थी।
कम बजट और सीमित संसाधनों के बावजूद ‘हनुमान अंश’ ने जिस तरह दर्शकों का दिल जीता है, उसकी कहानी फिल्म की शूटिंग जितनी ही दिलचस्प नजर आती है।